Birthday Special: कैसे बॉलीवुड में सफल अभिनेत्रियों के मापदंड को बदल दिया काल्की कोचलिन ने

Bollywood Hangover 2019-01-10T02:15:18+01:00 Bollywood

10 जनवरी.1984 को काल्कि कोएच्लिन (Kalki Koechlin) का जन्म पोंडिचेरी के एक फ्रेंच परिवार में हुआ था। आज वही काल्कि बॉलीवुड में अपने लुक की वजह से नहीं बल्कि अपने अभिनय क्षमता से जगह बनायीं हुई है। आज जानते है कि कैसे हुई उनके इस सफ़र की शुरुआत।  

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साल 2009 में जब डायरेक्टर अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap), शरतचंद्र चटोपाध्याय के क्लासिक देवदास को देव दी (Dev D,2009) में बना रहे थे, तब उन्हें लीक से हटकर एक्टरों की जरुरत पड़ी। 

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देव के लिए अभय देओल और पारो के किरदार के लिए माही गिल तो उन्हें मिल गयी थी, लेकिन चंद्रमुखी (चंदा) के किरदार के लिए उन्हें कोई अभिनेत्री नहीं मिल रही थी। उस वक्त उनके पास भारतीय ओरिजिन की फ्रेंच लड़की ऑडिशन देने आई। जिसके पूर्वज एइफिल टावर बनाने में बड़ा किरदार निभाया था। नाम था कल्कि कोएच्लिन (Kalki Koechlin)

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काल्कि कोएच्लिन (Kalki Koechlin) ने गोल्डस्मिथ, यूनिवर्सिटी ऑफ़ लन्दन से ड्रामा सीखा था। जब वो चंदा  के किरदार के लिए ऑडिशन देने आई  तब उन्हें अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) ने रिजेक्ट कर दिया था। कारण चन्दा के रोल के लिए काल्कि  कुछ ज्यादा ही विदेशी लग रही  थी।

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लेकिन जब बाद में अनुराग ने काल्कि का ऑडिशन टेप देखा तब अनुराग काल्कि को चन्दा के रोल के लिए सेलेक्ट किया। और इस तरह से काल्कि कोएच्लिन (Kalki Koechlin) देव डी (Dev D) की चंदा बनकर इंडस्ट्री में आई।

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अगर एक झटके में काल्कि कोएच्लिन (Kalki Koechlin) पर नजर जाती है तो वो बाकी  भारतीय अभिनेत्रियों से हर मामले में अलग दिखती है।

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फॉरेन की बाकी अभिनेत्रियों की तरह काल्की के हिंदी में कोई त्रुटी तो नहीं है लेकिन बोली में विदेशी छाप जरूर नजर आती है। नैन नक्श भी बाकी लड़कियों से अलग।

Navodayatimesफिर नजर जाता है उनके आँखों में, जिसमें दिखता है जबरदस्त कॉन्फिडेंस, फिर दिखता है सबको उनकी एक्टिंग जिसके सामने अच्छे अच्छे अभिनेता फीके पड़ जाते हैं और तब हमें महसूस होता है कि बॉलीवुड को ऐसे ही अभिनेत्रियों की जरुरत है जो स्क्रीन में केवल खुबसूरत बनकर नहीं बल्कि अपने एक्टिंग के दम पर दर्शकों को बांधे रख सके।

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देव डी (Dev D) जैसे फिल्म से इंडस्ट्री में आने के बाद भी काल्की को एक साल तक कोई और फिल्म नहीं मिली तब काल्की और अनुराग कश्यप ने साथ में द गर्ल इन येलो बूट्स (The Girl In Yellow Boots,2010) की कहानी लिखी। कहानी एक ऐसे ब्रिटिश लड़की की थी जो भारत में अपने पिता को खोजने आती है और उन्हें खोजने के लिए वो भारत में ही एक मसाज पार्लर में काम भी शुरू करती है। इस फिल्म के बाद ही बाद शैतान, संघाई जैसे फिल्मों से काल्की ने एक बात साबित कर दी थी कि अगर आपमें टैलेंट है तो आप खुद के लिए जगह बना ही लेंगी।

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फिल्मों के अलावा रियल लाइफ में भी काल्की ने कई ऐसे मुद्दों को उठाया जिससे आमतौर पर बाकी अभिनेत्रियाँ भागती है। जिसमें से ख़ास है फिल्मों में हीरो और हीरोइन को एक समान का पेमेंट मिलना। इसके अलावा उन्होंने जेंडर इक्वलिटी के मामले पर भी खुल कर आपनी बातें रखी है।

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काल्की इंडस्ट्री में उस वक्त आई है जब इंडस्ट्री को ही नहीं बल्कि पुरे देश को एक ऐसी औरतों की जरुरत है जो भारत में फैले संक्रिण सोच पर अपने काम और अपनी बातों से हमला कर सके और लोगों को ये एहसास दिलाये कि हमें कहाँ बदलना हैं।

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आज उनके जन्मदिन के मौके पर बॉलीवुड हैंगओवर (Bollywood Hangover) उन्हें जन्मदिन की हार्दिक बधाइयां देता है और ये उम्मीद करता है कि वो इंडस्ट्री और इस समाज पर अपने काम और सोच से असर छोड़ती रहे।  Happy Birthday, Kalki Koechlin                

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